आरटीई प्रवेश प्रक्रिया पर संकट

आरटीई प्रवेश प्रक्रिया पर संकट 

निजी स्कूलों ने फ्री प्रवेश देने से किया इनकार राज्य सरकार की लापरवाही के कारण प्रदेश में गरीब बच्चों के निजी स्कूलों में प्रवेश पर संकट

खड़ा हो गया है सरकार ने सत्र 2018 -19 कि आरटीई पूर्ण भरण राशि अब तक निजी स्कूलों को नहीं दी इससे गुस्साए निजी स्कूल संचालकों ने

रविवार को चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस सत्र की राशि का भुगतान नहीं किया गया तो आगामी सत्र 2020- 21 में आरटी में निशुल्क

प्रवेश नहीं देंगे स्कूल संचालकों का कहना है कि भुगतान नहीं होने से निजी स्कूलों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है प्रदेश में हर साल

करीब  33000 स्कूलों में डेढ़ लाख से अधिक विद्यार्थियों को निशुल्क प्रवेश मिलता है जयपुर में जवान नगर स्थित विवेकानंद स्कूल में रविवार

को स्वयंसेवी शिक्षण संस्था संघ की क्रांति बैठक हुई इसमें प्रदेश भर में पदक पदाधिकारी पहुंचे बैठक में संघ के कार्यकारी अध्यक्ष एलसी

भारतीय ने कहा कि प्रवेश के लिए दबाव तो बनाती है लेकिन नहीं कर रही सत्र 2018- 19 की राशि अब तक नहीं मिली और सत्र 2019 भी खत्म

हो गया इस सत्र की राशि पता नहीं कब मिलेगी इसलिए सभी ने तय किया है कि जब तक 2018- 19 की राशि का भुगतान नहीं हो जाता तब

तक निजी स्कूल आरटीई के तहत निशुल्क प्रवेश नहीं देंगे 2 साल पहले पार्टी की राशि ₹17000 थी जो अब घटकर ₹10500 कर दी गई है इस

मामले पर भी भारतीय ने सरकार की मंशा पर सवाल खड़े किए हैं भारतीय ने निजी स्कूलों की समस्याओं के समाधान के लिए अलग बोर्ड

बनाए जाने को भी मांग उठाई संघ के प्रदेश मंत्री किशन मित्तल ने कहा कि आने वाले बजट में शिक्षा बजट का केवल 20% निजी विद्यालयों को

अनुदान के रूप में दिया जाएगा ताकि इन संस्थाओं में काम कर रहे हैं शिक्षक और कर्मचारियों को वेतन बढ़ोतरी का लाभ दिया जा सके संघ

के संरक्षक विधि विशेषज्ञ पूर्व जस्टिस सरकार द्वारा पारित राजस्थान विश्वविद्यालय फीस 2016 पर लगाया और राष्ट्रपति के हस्ताक्षर होने के

कारण प्रभावी नहीं है